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Shani Chalisa

Shani Chalisa

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Shani Chalisa is a very famous Hindu devotional hymn which is addressed to Lord Shani. The recitation of Shani Chalisa is considered to be a holy and religious practice in Hindus. As per the Hindu mythology, Lord Shani is considered as Dand Adhikari, which means he is the in-charge of the punishments or the rewards for a person’s bad or good deeds respectively. So, recitation of Shani Chalisa on Saturdays is considered as a holy practice as it pleases Lord Shani.

Shani Chalisa in हिन्दी and English »

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥1॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
पिंगल, कृष्ो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥
सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥2॥

पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥3॥

रावण की गतिमति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवाय तोरी॥4॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजीमीन कूद गई पानी॥5॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥6॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देवलखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
वाहन प्रभु के सात सजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
जम्बुक सिंह आदि नख धारी।सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥7॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥8॥

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥9॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥10॥

॥दोहा॥
पाठ शनिश्चर देव को, की हों भक्त तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

|| Doha ||
!! Jai Ganesh Girija Suvan Mangal Karan Kripal
Denan Ke Dukh Door Kari Kijei Nath Nihal

|| Chopai||
Jai Jai Shri Shanidev Prabhu Sunahu Vinae Maharaj,
Karu Kripa He Ravi Tanae Rakhhu Jan Ki Laj. !!

!! Jayati Jayati Shanidev Deyala Karat Sada Bhagatan Pratipala.
Chari Bhuja, Tanu Sham Viraje Mathe Ratan Mukut Chavi Chaje.
Param Vishal Manohar Bhala Tedhi Drishti Bhrkuti Vikarala.
Kundal Shravan Chamacham Chamake Hiye Maal Muktan Mani Damke. !!

!! Kar Me Gada Trishul Kuthara Pal Bich Kare Arihi Sahara.Pingal,
Krishno, Chhaaya, Nandan, Yam Konsth, Raudra, Dukh Bhanjan.Sauri,
Mand Shani, Dash Nama Bhanu Putra Pujahe Sab Kama.
Jab Prabhu Prasan hove Jahi Rakhu Raav Kare shann Maahi !!

!! Parvathu Trun Hoi Niharat Trinahu Ko Parvat Kari Darat.
Raaj Milat Vann Ramahi Dinho Kaikeihu Ki Mati Hari Linho.
Vanhu Me Mrig Kapat Dikhai Matu Janki Gai Churai.
Lashanahi Shakti Vikal Karidara Machiga Dal Me Hahakara.!!

!! Ravan Ki Gati-Mati Baurai Ramachandra So Bair Badhai.
Diyo Keet Kari Kanchan Lanka, Baji Bajarang Bir Ki Danka.
Nrip Vikram Par Tuhi Pagu Dhara, Chitra Mayoor Nigali Gai Hara.
Haar Naulakha Lageo Chori Hath Pair Daravao Tori !!

!! Bhari Dasha Nikrasht Dikhao Telahi Ghar Kolhu Chalvao.
Vinae Raag Deepak Mah Kinhao Tab Prasann Prabhu Hve Sukh Dinho.
Harishchandra Nrip Nari Bikani Aaphu Bhare Dom Ghar Pani.
Taise Nal Par Dasha Sirani Bhunji-Meen Kud Gai Pani. !!

!! Shri Shankarahi Gaheo Jab Jai Paravati Ko Sati Karai.
Tanik Vikalokat Hi Kari Resa Nabh Udi Gato Gaurisut Seema.
Pandav Par Bhai Dasha Tumhari Bachi Dropadi Hoti Ughari.
Kaurav Ke Bhi Gati Mati Mareyo Yudh Mahabharat Kari Dareyo!!

!! Ravi Kah Mukh Meh Dhari Tatkala Lekar Kudi Pareye Patala.
Shesh Dev-Lakhi Vinati Lai Ravi Ko Mukh Te Diyo Chudai.
Vahan Prabhu Ke Saat Sujana Jag Diggaj Gardabh Mrig Svana.
Jambuk Sinh Aadi Nakh Dhari So Phal Jyotish Kehat Pukari. !!

!! Gaj Vahan Lakshmi Greh Aave Hay Te Sukh Sampati Upjave.
Gardabh Hani Kare Bahu Kaja Singh Sidhakar Raj Samaja.
Jambuk Budhi Nasht Kar Dare Mrig De Kasht Pran Sahare.
Jab Avahe Svan Savari Chori Aadi Hoe Dae Bhari. !!

!! Taisi Chari Charan Yeh Nama Svarn Lauh Chandi Aru Tama.
Lauh Charan Par Jab Prabhu Aave Dhan Jan Sampati Nasht Karave.
Samta Tamra Rajat Shubhkari Svarn Sarvasukh Mangal Bhari.
Jo Yah Shani Charitra Nit Gave Kabhu Na Dasha Nikrisht Satave !!

!! Adbhut Nath Dikhave Lela Kare Shatru Ke Nashi Bali Dhila.
Jo Pandit Suyogya Bulavi Vidhivat Shani Greh Shanti Krai.
Peepal Jal Shani Divas Chadhavat Deep Daan hai Bahu Sukh
Kehat Ram Sundar Prabhu Dasa Shani Sumirat Sukh Hot Prakasha !!

|| Doha ||
!! Path Shanishchar Dev Ko Ki Ho Bhagat Teyar,
Karat Path Chalis Din Ho Bhavsagar Paar !!

शनि चालीसा हिंदी में अर्थ सहित »

जय श्री शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

|| अर्थ ||
हे माता पार्वती के पुत्र भगवान श्री गणेश, आपकी जय हो। आप कल्याणकारी है, सब पर कृपा करने वाले हैं, दीन लोगों के दुख दुर कर उन्हें खुशहाल करें भगवन। हे भगवान श्री शनिदेव जी आपकी जय हो, हे प्रभु, हमारी प्रार्थना सुनें, हे रविपुत्र हम पर कृपा करें व भक्तजनों की लाज रखें।

चौपाई॥
जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिये माल मुक्तन मणि दमके॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

|| अर्थ ||
हे दयालु शनिदेव महाराज आपकी जय हो, आप सदा भक्तों के रक्षक हैं उनके पालनहार हैं। आप श्याम वर्णीय हैं व आपकी चार भुजाएं हैं। आपके मस्तक पर रतन जड़ित मुकुट आपकी शोभा को बढा रहा है। आपका बड़ा मस्तक आकर्षक है, आपकी दृष्टि टेढी रहती है ( शनिदेव को यह वरदान प्राप्त हुआ था कि जिस पर भी उनकी दृष्टि पड़ेगी उसका अनिष्ट होगा इसलिए आप हमेशा टेढी दृष्टि से देखते हैं ताकि आपकी सीधी दृष्टि से किसी का अहित न हो)। आपकी भृकुटी भी विकराल दिखाई देती है। आपके कानों में सोने के कुंडल चमचमा रहे हैं। आपकी छाती पर मोतियों व मणियों का हार आपकी आभा को और भी बढ़ा रहा है। आपके हाथों में गदा, त्रिशूल व कुठार हैं, जिनसे आप पल भर में शत्रुओं का संहार करते हैं।

चौपाई॥

पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन॥
सौरी, मन्द, शनि, दशनामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं। रंकहुं राव करैं क्षण माहीं॥
पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥

|| अर्थ ||
पिंगल, कृष्ण, छाया नंदन, यम, कोणस्थ, रौद्र, दु:ख भंजन, सौरी, मंद, शनि ये आपके दस नाम हैं। हे सूर्यपुत्र आपको सब कार्यों की सफलता के लिए पूजा जाता है। क्योंकि जिस पर भी आप प्रसन्न होते हैं, कृपालु होते हैं वह क्षण भर में ही रंक से राजा बन जाता है। पहाड़ जैसी समस्या भी उसे घास के तिनके सी लगती है लेकिन जिस पर आप नाराज हो जांए तो छोटी सी समस्या भी पहाड़ बन जाती है।

चौपाई॥

राज मिलत वन रामहिं दीन्हो। कैकेइहुं की मति हरि लीन्हो॥
बनहूं में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चतुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥
रावण की गति मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलाखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महँ कीन्हों। तब प्रसन्न प्रभु हवै सुख दीन्हों॥

|| अर्थ ||
हे प्रभु आपकी दशा के चलते ही तो राज के बदले भगवान श्री राम को भी वनवास मिला था। आपके प्रभाव से ही केकैयी ने ऐसा बुद्धि हीन निर्णय लिया। आपकी दशा के चलते ही वन में मायावी मृग के कपट को माता सीता पहचान न सकी और उनका हरण हुआ। उनकी सूझबूझ भी काम नहीं आयी। आपकी दशा से ही लक्ष्मण के प्राणों पर संकट आन खड़ा हुआ जिससे पूरे दल में हाहाकार मच गया था। आपके प्रभाव से ही रावण ने भी ऐसा बुद्धिहीन कृत्य किया व प्रभु श्री राम से शत्रुता बढाई। आपकी दृष्टि के कारण बजरंग बलि हनुमान का डंका पूरे विश्व में बजा व लंका तहस-नहस हुई। आपकी नाराजगी के कारण राजा विक्रमादित्य को जंगलों में भटकना पड़ा। उनके सामने हार को मोर के चित्र ने निगल लिया व उन पर हार चुराने के आरोप लगे। इसी नौलखे हार की चोरी के आरोप में उनके हाथ पैर तुड़वा दिये गये। आपकी दशा के चलते ही विक्रमादित्य को तेली के घर कोल्हू चलाना पड़ा। लेकिन जब दीपक राग में उन्होंनें प्रार्थना की तो आप प्रसन्न हुए व फिर से उन्हें सुख समृद्धि से संपन्न कर दिया।

चौपाई॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
श्री शंकरहि गहयो जब जाई। पार्वती को सती कराई॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रोपदी होति उधारी॥
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ई॥

|| अर्थ ||
आपकी दशा पड़ने पर राजा हरिश्चंद्र की स्त्री तक बिक गई, स्वयं को भी डोम के घर पर पानी भरना पड़ा। उसी प्रकार राजा नल व रानी दयमंती को भी कष्ट उठाने पड़े, आपकी दशा के चलते भूनी हुई मछली तक वापस जल में कूद गई और राजा नल को भूखों मरना पड़ा। भगवान शंकर पर आपकी दशा पड़ी तो माता पार्वती को हवन कुंड में कूदकर अपनी जान देनी पड़ी। आपके कोप के कारण ही भगवान गणेश का सिर धड़ से अलग होकर आकाश में उड़ गया। पांडवों पर जब आपकी दशा पड़ी तो द्रौपदी वस्त्रहीन होते होते बची। आपकी दशा से कौरवों की मति भी मारी गयी जिसके परिणाम में महाभारत का युद्ध हुआ। आपकी कुदृष्टि ने तो स्वयं अपने पिता सूर्यदेव को नहीं बख्शा व उन्हें अपने मुख में लेकर आप पाताल लोक में कूद गए। देवताओं की लाख विनती के बाद आपने सूर्यदेव को अपने मुख से आजाद किया।

Shani Chalisa Chaupai Meaning in Hindi
Shani Chalisa Chaupai Meaning in Hindi 2

Shani Chalisa Translation in English (Meaning in English) »

॥ Doha॥

Jai Ganesh Girija Suwan, Mangal Karan Krupaal.
Deenan Ke Dhuk Dhoor Kari, Kheejai Naath Nihaal.
Jai Jai Sri Shanidev Prabhu, Sunahu Vinay Maharaaj
Karahu Krupa Hey Ravi Thanay, Rakhahu Jan Ki Laaj.

(Oh Lord Ganesha for whom a mountain is like a flower, please be merciful,
Takeaway the troubles of the tortured and raise our consciousness.
Oh Shani Dev – the gracious Lord, listen to my prayers oh victorious one,
Show us your kindness oh lord and protect the modesty and purity of your devotees)

॥ Chaupai॥

Jayathi Jayathi Shani Dayaala,
Karath Sadha Bhakthan Prathipaala.
Chaari Bhuja, Thanu Shyam Viraajai,
Maathey Rathan Mukut Chavi Chaajai.
(Victory be to the merciful Shani Dev, you are the protector of those who take refuge in you. Oh the four armed one with a beautiful dark skin and a forehead decorated with a pearl studded crown.)

Param Vishaal Manohar Bhaala,
Tedi Dhrishti Bhrukuti Vikraala.
Kundal Shravan Chamaacham Chamke,
Hiye Maal Mukthan Mani Dhamkai.
(You look so smart and possess a bright spear. Thou create a frowning look by looking like a slayer. The ear rings and pearl necklace you wear dazzle in the light.)

Kar Me Gadha Thrishul Kutaara,
Pal Bich Karai Arihi Sahara.
Pinghal, Krishno, Chaaya, Nandhan,
Yum, Konasth, Raudra, Dhuk Bhajan.
(You carry with you a mace, a trident and a battle-axe, Slaying your enemies in one go. Pinglo, Krishna, Son of Chhaya, Yama, Konastha, Raudra & the Annihilator of pain & suffering.)

Sauri, Mandh Shani, Dhasha Naama,
Bhanu Puthra Poojhin Sab Kaama.
Jaapar Prabu Prasan Havain Jhaahin,
Rakhhun Raav Karai Shan Maahin.
(Sauri, Manda – these ten names that belong to you, Oh son of Lord Surya, you bring fame to them. When you are pleased or displeased with someone, You can immediately transform him from a beggar to a king or the reverse.)

Parvathhu Thrun Hoi Nihaarath,
Thrunhu Ko Parvath Kari Daarath.
Raaj Milath Ban Raamhin Dheenhyo,
Kaikeyihu Ki Mathi Hari Linhiyo.
(At your will, even simple things can become complex and tough. Your blessings can turn the toughest tasks into simple ones. When you chose to twist the wish of Kaikeyi, the wife of Dasaratha, even Rama had to give up his kingdom and leave to the forest in exile.)

Banhu Mae Mrug KapatDhikaayi,
Maathu Janki Gayi Churaayi.
Lakhanhin Shakthi Vikal Kari Daara,
Machiga Dhal Mae Haahaakaar.
(In the woods Lord Rama was distracted by an illusory deer, And as a result Sita –an incarnation of Mother Nature – was kidnapped. Even Lord Rama’s brother Lakshmana fainted, Inspiring fear in every member of Lord Rama’s army.)

Raavan Ki Ghathi-Mathi Bauraayi,
Ramchandra Soan Bair Badaayi.
Dhiyo Keet Kari Kanchan Lanka,
Baji Bajarang Beer Ki Danka.
( Ravana lost touch with his sense and wisdom, And ended up picking a fight against Lord Rama, But as soon as Bajrang Bali (Lord Hanuman) invaded Ravana’s Lanka, The Golden Lanka was turned into ruins.)

Nrup Vikram Par Thuhin Pagu Dhaara,
Chitra Mayur Nigli Gai Haara.
Haar Naulakka Laagyo Chori,
Haath Pair Darvaayo Thori.
(While afflicted by Shani, King Vikramaditya’s necklace was swallowed by a pictured peacock. Allegations of theft befell even Lord Krishna who was badly beaten up.)

Bhaari Dhasha Nikrusht Dhikaayo
Thelhin Ghar Kholhu Chalvaayo.
Vinay Raag Dheepak Mah Khinhayo,
Thab Prasann Prabhu Hvai Sukh Dheenhayo.
(When life was filled with miseries during your Maha Dasha period, even Lord Krishna had to work in the house of a layman. When he prayed with devotion to you, he was blessed with all that he wanted.)

Harishchandrahun NrupNaari Bhikani,
Aaphun Bharen Dome Gar Paani.
Thai nal par dasha sirani’
Bhunji-Meen Koodh Gayi Paani.

(Even King Harishchandra suffered during your Dasha period, He lost all that he owned and even his wife was sold away. He was forced to do menial work, At a house of a poor sweeper.)

Sri Shankarhin GahyoJab Jaayi,
Paarvathi Ko Sathi Karaayi.
Thanik Vilokath Hi Kari Reesa,
Nabh Udi Gayo Gaurisuth Seesa.

(When you transited through the zodiac sign of Lord Shiva, His wife Parvati (in her first incarnation as Sati) had to suffer injury through incineration in fire.When you looked at the young Lord Ganesha, His head bounced into the sky and was destroyed.)

Paandav Par Bhay Dasha Thumhaari,
Bachi Draupadhi Hothi Udhaari.
Kaurav Ke Bi Gathi Mathi Maaryo,
Yudh Mahabharath Kari Daryo.
(When the Pandavas were going through your Dasha period, They even lost their wife Draupadi in a bet and were left with no belongings. Even the Kauravas were not spared and they lost their sense and wisdom, Sparking the great battle of Mahabharata against the Pandavas.)

Ravi Kah Mukh Mahn Dhari Thathkala,
Lekar Koodhi Paryo Paathaala.
Sesh Dhev-Lakhi Vinthi Laayi,
Ravi Ko Mukh Thay Dhiyo Chudaayi.
(Oh Shani Dev, you swallowed the sun, And went away into the third world, Only when all the other Gods came together to pray to you, Was the Sun saved from eternal obscurity.)

Vaahan Prabhu Kay Sath Sujana,
Juj Dhigaj Gadharbh Mrugh Swaana.
Jambuk Sinh Aadhi Nakh Dhari,
So Phal Jyothish Kahath Pukari.
(Oh Shani Dev, you ride on seven vehicles including an elephant, horse, ass, deer, dog, jackal and lion. All these animals possess terrible nails. Therefore astrologers declare .. . )

Hay Thay Sukh Sampathi Upjaavai.
Gadharbh Haani Karai Bahu Kaaja,
Sinha Sidhkar Raaj Samaja.
(While riding on an elephant, you bring wealth; while riding on a horse, you bring comfort and wealth; when riding on an ass, you bring losses in several ways, riding on a lion, you bring kingdoms and fame)

Jhambuk Budhi NashtKar Darai,
Mrug Dhe Kasht Praan Samharai.
Jab Aavahi Prabu Svan Savaari,
Choru Aaadhi Hoy Dar Bhaari.

(Riding on a jackal, Shani Dev, takes away all wisdom, sense and intellect, Riding on a deer, Shani Dev grants death and pain. Riding on a dog, Shani Dev curses one with accusations of theft, Making the cursed a beggar and the equivalent of a lowly stone.)

Thaishi Chaari CharanYuh Naama,
Swarn Laoh Chaandhi Aru Thama.
Lauh Charan Par Jab Prabu Aavain,
Daan Jan Sampathi Nashta Karavain.

(In a similar manner, you have four different forms of your feet, Made of Gold,Iron, Silver and Copper. When you come home with your Iron feet, You destroy all of one’s wealth and belongings.)

Samatha ThaamraRajath Shubhkari ,
Swarn Sarva Sukh Mangal Bhaari.
Jo Yuh Shani Charithra Nith Gavai,
Kabahu Na Dasha Nikrushta Sathavai.
(Your Copper feet signal that things will be left unharmed, while Silver feet signal many benefits, And brightest of them all, your golden feet bring all types of happiness. Whoever sings your prayers in a manner like this, oh Shani Dev, He is never troubled by your adverse periods.)

Adhbuth NathDhikavain Leela,
Karain Shatru Kay Nashi Bhali Deela.
Jo Pundith Suyogya Bulvaayi
Vidhvath Shani Gruha Shanthi Karayi.
(You display your magical actions before your devotees, Killing and leaving their enemies helpless.Educated men and priests who perform your pooja (holy ritual), Manage to please you through Vedic methods.)

Peepal Jal Shani Diwas Chadavath,
Deep Dhaan Dhai Bahu Sukh Pawath.
Kahath Raam Sundhar Prabu Dhasa,
Shani Sumirath Sukh Hoth Prakasha.
(Since Peepal tree represents Shani, those who water it on Saturdays and offer incense sticks to your feet will get all comforts, wealth and health. Oh handsome Shani Dev, thus says Rama, your devotee.)

॥ Doha॥

Path Shanishchar Dev Ko, Ki Ho Bhakt Taiyaar,
Karat Path Chalis Din, Ho Bhavasaagar Paar.

(A devotee who is ever prepared to sing with devotion to Shani Dev, And chants Shri Shani Chalisa for forty days, will easily find his way to Heaven)

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